मंदिर में जिसे मिले खुदा
और मस्जिद में भगवान मिले
ऐसा इस धरती पर मुझे
कहीं कोई तो इंसान मिले।
मंदिर मस्जिद में जो ना बसा ,
बस मेरे-तेरे दिल में बसा ,
पोथी पत्थर से जो हो अलग ,
कोई ऐसा भी भगवान मिले।
चाहतें पूरी हुई जिसकी
कोई ऐसा तो आबाद मिले
रूह कैद न हो जिस्म में जिसकी
कोई ऐसा भी आज़ाद मिले।
रूह कैद न हो जिस्म में जिसकी
कोई ऐसा भी आज़ाद मिले।
और मस्जिद में भगवान मिले
ऐसा इस धरती पर मुझे
कहीं कोई तो इंसान मिले।
मंदिर मस्जिद में जो ना बसा ,
बस मेरे-तेरे दिल में बसा ,
पोथी पत्थर से जो हो अलग ,
कोई ऐसा भी भगवान मिले।
चाहतें पूरी हुई जिसकी
कोई ऐसा तो आबाद मिले
रूह कैद न हो जिस्म में जिसकी
कोई ऐसा भी आज़ाद मिले।
रूह कैद न हो जिस्म में जिसकी
कोई ऐसा भी आज़ाद मिले।
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