निकलता है घर से तो दूर तक चलता है
उड़ते है जो पंछी कभी तो उन्हें आसमां मिलता है।
प्यार-मोहब्बत-इश्क़ में मिलावट बहुत है यहाँ ,
ये मिलता है तो सिर्फ माँ के पास ही खरा मिलता है।
अभी वक़्त है तो माँ का दामन ओढ़ सो जाया करो
यह सुकून यहीं है कहीं और नहीं मिलता है।
माँ की हंसी में दो पल तुम भी मुस्कुरा लिया करो
वक़्त गुजर जाता है फिर ये हसीं मंजर नहीं मिलता है।
व्यस्त ना होना इतना की उनकी यादें उधड़ जाएँ
यहाँ सिलने वाला इन्हे कोई दर्जी नहीं मिलता है।
जो मुझ पर यकीं ना हो तो खुद आज़मा लेना
ये वो दर है जहाँ सिर्फ प्यार मिलता है।
मंदिर ,मस्जिद की कतारों से निकलो 'विश्वजीत'
माँ से बेहतर कहीं कोई खुदा मिलता है ?
-विश्वजीत सिंह
उड़ते है जो पंछी कभी तो उन्हें आसमां मिलता है।
प्यार-मोहब्बत-इश्क़ में मिलावट बहुत है यहाँ ,
ये मिलता है तो सिर्फ माँ के पास ही खरा मिलता है।
अभी वक़्त है तो माँ का दामन ओढ़ सो जाया करो
यह सुकून यहीं है कहीं और नहीं मिलता है।
माँ की हंसी में दो पल तुम भी मुस्कुरा लिया करो
वक़्त गुजर जाता है फिर ये हसीं मंजर नहीं मिलता है।
व्यस्त ना होना इतना की उनकी यादें उधड़ जाएँ
यहाँ सिलने वाला इन्हे कोई दर्जी नहीं मिलता है।
जो मुझ पर यकीं ना हो तो खुद आज़मा लेना
ये वो दर है जहाँ सिर्फ प्यार मिलता है।
मंदिर ,मस्जिद की कतारों से निकलो 'विश्वजीत'
माँ से बेहतर कहीं कोई खुदा मिलता है ?
-विश्वजीत सिंह
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